The Year Book / प्रस्तावना / 00
उदय का राजा
मुकुट से पहले कैमरा था। कैमरे से पहले एक टूटन।
21 फ़्रेम / ORIGIN_000 / चलते रहो
इस अध्याय से संगीत की ओर चलेंशहर मेरा नाम नहीं जानता था।
मैं एक ऐसा भविष्य साथ लेकर आया था जो अब मुझ पर ठीक नहीं बैठता था। टोरंटो मेरे चारों ओर उठा खड़ा था, काँच और दूरियों से भरा। शोर के कहीं ऊपर, एक खिड़की ने आख़िरी रोशनी थाम रखी थी। मुझे नहीं पता था मैं क्या बन रहा हूँ। बस इतना पता था कि मैं उसे देखना चाहता हूँ।
एक दरवाज़ा आवाज़ की दुनिया में खुला।
संगीत पहला कमरा था जिसने मुझे भीतर आने दिया। फ़र्श थिरक उठा। चेहरे धुएँ में ग़ायब होते और चमकती रोशनी में फिर उभर आते। कैमरा क्या-क्या कर सकता है, यह पूरी तरह जानने से पहले ही मैंने उसे उठा लिया। पल भर के लिए कमरा ठहर गया। मुझे एक भाषा मिल गई थी।
कुछ ख़ामोशियाँ रोशनी बदल देती हैं।
कुछ चीज़ें मैं फ़्रेम के बाहर रखता हूँ। उनका भार मेरे काम में है: किसी भाव का इंतज़ार करने में, खाली कुर्सी पर ध्यान जाने में। मैंने वे छोटी चीज़ें सँजोना शुरू किया जिन्हें दुनिया अनदेखा कर आगे बढ़ने को तैयार थी। मेरे लिए अब उनसे नज़र चुराना नामुमकिन हो गया था।
साधारण जगमगाने लगा।
सड़क पर एक पत्ते ने मुझे रोक लिया। फिर किसी अजनबी के हाथों ने। फिर मेरे अपने प्रतिबिंब ने। शहर बिना पूछे दृश्य पेश करता रहा कि मैं तैयार हूँ या नहीं। कैमरे की ओर हाथ बढ़ाने से पहले मैंने देखना सीखा। उस छोटे-से ठहराव ने तस्वीर बदल दी।
काग़ज़ एक साम्राज्य बन गया।
जिसे खो देना मुझे गवारा नहीं था, उसे मैंने छाप लिया। बिखरे पल एक ऐल्बम में जुट गए। चेहरों को पड़ोसी मिले। एक साल ऐसी चीज़ बन गया जिसे मैं हाथ में थाम सकता था। The Year Book की शुरुआत बिना सिंहासन, बिना गवाह, इस शांत आग्रह के साथ हुई कि ये पल बने रहने के हक़दार हैं।
इस उदय का कोई दर्शक नहीं था।
रोशनी बुझ जाने के बाद भी मैं चलता रहा। रास्ते में कहीं कैमरा ढोने वाले इंसान के भीतर से फ़ोटोग्राफ़र उभरने लगा। Aurelian इसे एक शुरुआत कहता। Criminal Code पूछता कि दरवाज़ा खुला किसने छोड़ा। मैं तब तक बाहर निकल चुका था, अगले फ़्रेम की तलाश में।
अगली कहानी आपकी हो सकती है
आइए कुछ ऐसा रचें
जिसे सँभालकर रखना चाहें।
पोर्ट्रेट, छोटे उत्सव, स्वतंत्र विचार और महत्वाकांक्षी काम। शुरुआत उससे करें जो आपके लिए मायने रखता है।




















